ठाकरे बंधुओं का ऐतिहासिक मिलन: 20 साल बाद मंच साझा, मराठी अस्मिता के लिए साथ आए उद्धव और राज

दो दशकों की राजनीतिक तल्ख़ियों और पारिवारिक दूरी के बाद शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के बीच मेल-मिलाप की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप ले लिया है। रविवार को मुंबई के वरली में आयोजित “मराठी विजय रैली” के मंच पर दोनों नेता पहली बार साथ नजर आए।यह दृश्य न केवल राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए चौंकाने वाला था, बल्कि शिवसेना-मनसे समर्थकों के लिए भी भावनात्मक क्षण बन गया।

उद्धव ठाकरे ने रैली में कहा“जब परिवार एकजुट होता है, तो हर चुनौती आसान हो जाती है। मराठी अस्मिता की रक्षा के लिए अब साथ चलना जरूरी है।”. राज ठाकरे ने भी भावुक स्वर में कहा “हमारी दूरियाँ मतभेदों से थीं, मनभेदों से नहीं। अब वक्त है महाराष्ट्र को नई दिशा देने का।”

आप को बता दे की 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर मनसे बनाई थी। तब से अब तक दोनों के बीच कटुता बनी रही – चुनावी टकराव, बयानों की जंग और कार्यकर्ताओं की झड़पें आम रहीं। 2024 लोकसभा चुनावों में शिवसेना और मनसे दोनों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसके बाद से दोनों दलों के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज़ हुई।

मंच पर उद्धव और राज ने एक-दूसरे को गले लगाया। ‘जय महाराष्ट्र’ के नारों से पूरा मैदान गूंज उठा। मंच पर बाल ठाकरे की तस्वीर के सामने दोनों ने एक साथ पुष्पांजलि अर्पित की। ठाकरे बंधुओं का यह पुनर्मिलन सिर्फ पारिवारिक सौहार्द नहीं, बल्कि मराठी राजनीति के पुनर्गठन की शुरुआत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह एकता केवल मंच तक सीमित रहती है या वास्तव में एक राजनैतिक शक्ति केंद्र में तब्दील होती है।