दिल्ली की प्रसिद्ध लव-कुश रामलीला समिति ने इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका के लिए अभिनेत्री पूनम पांडे को चुना था। इस घोषणा के तुरंत बाद ही हिंदू संगठनों, विशेष रूप से विश्व हिंदू परिषद (VHP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसका कड़ा विरोध किया। विरोध का मुख्य कारण यह था कि पूनम पांडे की सार्वजनिक छवि और पूर्व में की गई अश्लील सामग्री से संबंधित गतिविधियाँ धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन की गरिमा के अनुकूल नहीं मानी गईं।
विरोध बढ़ने पर रामलीला समिति ने निर्णय लिया कि वे पूनम पांडे को रामलीला से हटा रहे हैं। समिति ने कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत पूर्वाग्रह के आधार पर नहीं बल्कि धार्मिक भावनाओं और आयोजन की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
इस निर्णय के बाद VHP और BJP दोनों ने समिति के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे धार्मिक आयोजनों की शुद्धता और गरिमा बनी रहेगी। यह प्रकरण भारतीय समाज में धर्म, संस्कृति और सार्वजनिक छवि के टकराव का एक उदाहरण बन गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि धार्मिक आयोजनों में भाग लेने वालों की सामाजिक स्वीकार्यता को भी गंभीरता से लिया जाता है।

