I Love Mohammad vs I Love Mahadev: देशभर में पोस्टर विवाद और हिंसा का हाल

देश के कई शहरों में अचानक सोशल मीडिया और गलियों में “I Love Mohammad” और “I Love Mahadev” के पोस्टरों का ट्रेंड सामने आया। कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद अब गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में फैल चुका है। गलियों, सड़कों और चौराहों पर पोस्टर लगे दिखाई दिए, और सोशल मीडिया पर भी यह तेजी से वायरल हुआ।

कानपुर से शुरू हुआ विवाद

कानपुर के रावतपुर इलाके में 5 सितंबर 2025 को बारावफात के दौरान मुस्लिम युवाओं ने “I Love Mohammad” लिखा पोस्टर और बैनर लगाया। इसके बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने विरोध जताया। पुलिस ने मामले में हस्तक्षेप कर बैनर हटवाए और 9 नामजद तथा 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

पुलिस का कहना है कि मामला सिर्फ बैनर का नहीं था, बल्कि तय जगह से अलग टेंट लगाने और जुलूस के दौरान अन्य समुदाय के धार्मिक पोस्टरों को फाड़ने को लेकर एफआईआर हुई। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह सिर्फ पैगंबर मोहम्मद के प्रति सम्मान और प्यार जताने का तरीका था और इसमें किसी तरह का सांप्रदायिक भड़काव नहीं है।

देशभर में फैलता विवाद

कानपुर से शुरू हुआ यह विवाद धीरे-धीरे यूपी के अन्य शहरों और फिर महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड तक फैल गया।

  • उत्तर प्रदेश: उन्नाव, महाराजगंज और कौशांबी में विरोध प्रदर्शन हुए, कई मुकदमे दर्ज किए गए और कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया। लखनऊ में मुस्लिम महिलाएं विधानसभा के सामने बैनर लेकर बैठ गईं।
  • महाराष्ट्र: नागपुर में मस्जिदों पर “I Love Mohammad” के पोस्टर लगाए गए और जुलूस निकाले गए।
  • उत्तराखंड: काशीपुर में अनुमति के बिना निकाले गए जुलूस में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प और पत्थरबाजी हुई।

गुजरात में हिंसक घटनाएं

गांधीनगर में नवरात्रि के दौरान गरबा पंडाल में I Love Mohammad vs I Love Mahadev विवाद ने हिंसा का रूप ले लिया।

  • पहले नारेबाजी हुई, फिर पत्थरबाजी शुरू हुई।
  • दुकानों में आग लगाई गई और कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
  • घटना का वीडियो और सीसीटीवी फुटेज में सब कैद हो गया।
  • स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल प्रभावित इलाकों में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया।

महाराष्ट्र में पोस्टर आंदोलन

मुंबई के गरबा पंडालों में I Love Mahadev पोस्टरों के साथ युवतियां और महिलाएं पहुंचने लगी हैं। आरे कॉलोनी के एक पंडाल में यह विरोध देखा गया।