Maharashtra: शिवसेना (UBT)-मनसे गठबंधन को बड़ा झटका, बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी चुनाव में ठाकरे बंधुओं की करारी हार

मुंबई:
मुंबई नगर निगम बेस्ट के कर्मचारियों से जुड़ी हाई-प्रोफाइल सहकारी ऋण समिति के चुनाव के लिए सोमवार को मतदान हुआ। मतगणना मंगलवार को शुरू हुई और देर रात तक जारी रही। चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और शिवसेना (यूबीटी) के पैनल को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली।

चुनाव परिणाम

सोमवार को हुए मतदान और मंगलवार देर रात तक चली मतगणना में पांच पैनलों के बीच मुकाबला हुआ। नतीजों में शशांक राव के पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 सीटें जीतीं, जबकि महायुति समर्थित सहकार समृद्धि पैनल ने 7 सीटें अपने नाम कीं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के संयुक्त ‘उत्कर्ष पैनल’ को 21 में से एक भी सीट नहीं मिल सकी।

नौ साल बाद सत्ता से बाहर

बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के 15,000 से अधिक सदस्य हैं। लंबे समय तक इस संस्था पर शिवसेना (यूबीटी) से जुड़ी बेस्ट कामगार सेना का वर्चस्व रहा है। लगातार नौ साल तक सत्ता में रहने के बाद पहली बार ठाकरे गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

बेस्ट कामगार सेना के अध्यक्ष सुहास सामंत ने इस हार पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“हमारे सभी 21 उम्मीदवारों की हार चौंकाने वाली है। इस चुनाव में पैसों का बोलबाला रहा।”

भाजपा का तंज – ‘ठाकरे ब्रांड शून्य’

इस हार पर भाजपा ने ठाकरे बंधुओं को घेरा। भाजपा एमएलसी प्रसाद लाड ने कहा कि इस चुनाव में ‘ठाकरे ब्रांड’ पूरी तरह शून्य साबित हुआ है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –

“21 सीटों में से एक भी सीट जीतने में नाकाम ठाकरे बंधुओं को यह संदेश मिल गया है कि उनकी राजनीतिक ताकत कहां खड़ी है।”

वहीं, भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने इसे मुंबई में भाजपा के लिए शुभ संकेत बताया। उन्होंने कहा कि मजदूरों और कर्मचारियों ने भाजपा को समर्थन देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबईकरों का रुझान भाजपा की ओर है।

गठबंधन पर उठे सवाल

गौरतलब है कि हाल ही में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आए थे। यह गठबंधन मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से पहले ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा था। लेकिन बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी के नतीजों ने गठबंधन की प्रभावशीलता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिवसेना (यूबीटी) और मनसे दोनों ही दलों ने इस चुनाव को अपनी एकता और शक्ति प्रदर्शन का अवसर माना था। लेकिन नतीजों ने संकेत दिया है कि मुंबई की जमीनी राजनीति में उनका प्रभाव उम्मीद से काफी कमजोर है।