आनंदीबेन पटेल ने सूरत में ‘पटेलवाद’ की आलोचना करते हुए जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर एकता, समाज सेवा और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
सूरत: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने सूरत में आयोजित ‘क्राफ्ट रूट’ कार्यक्रम के दौरान पाटीदार समाज में फैल रहे जातिवाद और आंतरिक विभाजन पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज को ‘पटेलवाद’ जैसी संकीर्ण मानसिकता से बाहर निकलकर एकता और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में अपनी बेटी और खोडलधाम संगठन की अध्यक्ष अनार पटेल की उपस्थिति में आनंदीबेन पटेल ने समाज में व्याप्त लेउवा और कड़वा पाटीदारों के बीच के विभाजन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हम कब तक लेउवा और कड़वा के नाम पर बंटे रहेंगे? मैं भी पटेल हूं और मुझे इस पर गर्व है, लेकिन मेरे खून में कहीं भी पटेलवाद नहीं है।”
उन्होंने कहा कि पटेल होना गर्व की बात है, लेकिन यह गर्व समाज की सेवा, नेतृत्व और मानवता से जुड़ा होना चाहिए, न कि जाति के संकीर्ण दायरे तक सीमित होना चाहिए। उन्होंने समाज के सक्षम और संपन्न लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंद और प्रतिभाशाली बच्चों की शिक्षा में मदद करें, चाहे वे किसी भी जाति या समुदाय से क्यों न हों।
आनंदीबेन पटेल ने यह भी कहा कि पहले के समय में समाज के लोग पूरे गांव की जिम्मेदारी लेते थे और हर जरूरतमंद की मदद करते थे। आज भी उसी भावना को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज का असली विकास तभी संभव है जब हम जातिवाद से ऊपर उठकर सभी के लिए समान अवसर और सहयोग सुनिश्चित करें।
उन्होंने अपनी बेटी अनार पटेल को भी सार्वजनिक मंच से संदेश देते हुए कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन का उद्देश्य केवल अपनी जाति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग के लोगों की मदद करना उसका कर्तव्य होना चाहिए।
गौरतलब है कि गुजरात में आने वाले समय में स्थानीय स्वराज्य और महानगर पालिका चुनाव होने वाले हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में आनंदीबेन पटेल का यह बयान सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
आनंदीबेन पटेल ने अंत में समाज को एकता का संदेश देते हुए कहा कि हमें जाति के नाम पर बंटने के बजाय एकजुट होकर देश और समाज के विकास में योगदान देना चाहिए।
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