गुजरात विधानसभा में BJP नेताओं की बड़ी चूक: 3 साल बाद भी नियमों से अनजान दिखे विधायक

गुजरात विधानसभा सत्र में हार्दिक पटेल और पूर्णेश मोदी समेत BJP विधायकों की गलतियां सामने आईं, संसदीय जानकारी और तैयारी पर सवाल उठे।

गांधीनगर: गुजरात विधानसभा के वर्तमान सत्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ विधायकों की कार्यप्रणाली और संसदीय नियमों की समझ पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव जीतने के तीन वर्ष बाद भी युवा नेता हार्दिक पटेल, राजकोट की विधायक दर्शिता शाह और वरिष्ठ नेता पूर्णेश मोदी द्वारा की गई तकनीकी और तथ्यात्मक गलतियों ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान असहज स्थिति पैदा कर दी।

हार्दिक पटेल ने बिल प्रस्तुत करने में की प्रक्रिया संबंधी गलती

विधानसभा में जब ‘राज्य खिलाड़ी प्रोत्साहन विधेयक’ (निजी सदस्य विधेयक) प्रस्तुत करने का समय आया, तब विरमगाम के विधायक हार्दिक पटेल ने संसदीय प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार, विधेयक प्रस्तुत होने के बाद उस पर चर्चा की जाती है, लेकिन हार्दिक पटेल ने प्रस्तावना पढ़ने के तुरंत बाद ही विधेयक वापस लेने की बात कह दी।

इस दौरान अकोटा के विधायक चैत्यन्य देसाई अपने विचार रख रहे थे, लेकिन अध्यक्ष को उन्हें बीच में ही रोकना पड़ा। अध्यक्ष ने हार्दिक पटेल से स्पष्ट पूछा कि यदि वे विधेयक वापस लेना चाहते हैं, तो उस पर चर्चा नहीं हो सकती। इसके बाद हार्दिक पटेल ने अपनी सहमति दी और खेल मंत्री ने विधेयक पर सरकार का पक्ष रखा। इस घटना से सत्तारूढ़ दल के विधायकों के बीच भी असंतोष और चर्चा का माहौल बन गया।

दर्शिता शाह ने स्वास्थ्य योजना के आंकड़ों में की तथ्यात्मक चूक

राजकोट की विधायक दर्शिता शाह ने ‘राइट टू हेल्थ’ विधेयक पर चर्चा के दौरान दावा किया कि राज्य सरकार नागरिकों को 10 लाख रुपये तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करती है। हालांकि, यह दावा वास्तविक सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाता। उनकी इस टिप्पणी के बाद विपक्ष को सरकार और विधायकों की जानकारी पर सवाल उठाने का मौका मिल गया।

अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे पूर्णेश मोदी से भी हुई बड़ी गलती

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान, जब वरिष्ठ नेता पूर्णेश मोदी अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे थे, तब उन्होंने उत्साह में यह घोषणा कर दी कि वर्ष 2036 के ओलंपिक खेलों का आयोजन अहमदाबाद में होगा।

हालांकि, वास्तविकता यह है कि अहमदाबाद को अभी केवल वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी मिली है, जबकि 2036 ओलंपिक के लिए भारत ने केवल दावेदारी की प्रक्रिया शुरू की है। अध्यक्ष द्वारा की गई इस गलत घोषणा ने विधानसभा की गरिमा और जनप्रतिनिधियों की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए।

विधानसभा की कार्यप्रणाली और तैयारी पर उठे सवाल

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कुछ जनप्रतिनिधियों को अब भी संसदीय नियमों और महत्वपूर्ण तथ्यों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण मंच पर इस तरह की गलतियां न केवल जनप्रतिनिधियों की तैयारी पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गंभीरता को भी प्रभावित करती हैं।

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