सूरत से बड़ी खबर सामने आई है। विरमगाम से भाजपा विधायक हार्दिक पटेल सहित पाटीदार आंदोलन से जुड़े सभी आरोपियों को राजद्रोह के मामले से राहत मिल गई है। सूरत सेशंस कोर्ट ने सरकार की ओर से केस वापस लेने की अर्जी को मंजूरी देते हुए हार्दिक पटेल, अल्पेश कथीरिया, विपुल देसाई और चिराग देसाई को राजद्रोह के आरोपों से मुक्त कर दिया है।
यह मामला पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान सूरत के अमरोली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। राज्य सरकार ने हाल ही में इस पुराने मामले को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही वर्षों से लंबित राजद्रोह केस का औपचारिक रूप से अंत हो गया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान आंदोलन से जुड़े कई नेताओं पर राजद्रोह समेत गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे। हार्दिक पटेल उस समय आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे और बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला न केवल संबंधित नेताओं के लिए बड़ी राहत है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और कानूनी विवाद पर भी विराम लगाता है। कोर्ट के इस निर्णय के बाद पाटीदार आंदोलन से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।
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