मतदाताओं की नागरिकता जांच का अधिकार चुनाव आयोग को: सुप्रीम कोर्ट में ईसी का पक्ष

नई दिल्ली। चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति को शामिल करने से पहले उसकी भारतीय नागरिकता की जांच करना उसका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। आयोग ने कहा कि भारत का संविधान नागरिक-केंद्रित है और इसलिए प्रत्येक निर्वाचित प्रतिनिधि तथा शासन की तीनों संस्थाओं के प्रमुखों का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।

6 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी के माध्यम से याचिकाकर्ताओं के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। आयोग ने दलील दी कि मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नागरिकता की जांच आवश्यक है, ताकि कोई भी विदेशी नागरिक मतदान प्रक्रिया में शामिल न हो सके।

मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे लेकर शीर्ष अदालत में सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आधार विवरण के आधार पर मतदाता सूची में शामिल करना पर्याप्त नहीं है। आयोग के अनुसार, SIR के दौरान नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना अनिवार्य है।

इस अहम संवैधानिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को आगे की सुनवाई होने की संभावना है।

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