चेन्नई: पोलिमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Polymatech Electronics Ltd.) को ₹157.20 करोड़ के कथित भुगतान डिफॉल्ट के मामले में गंभीर कानूनी संकट का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी के खिलाफ ऑपरेशनल लेनदारों ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चेन्नई में नादारी (Insolvency) कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है।
इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने सलाहकार शुल्क (Consultancy Fees) और इक्विटी प्रतिबद्धताओं (Equity Commitments) का भुगतान करने में बार-बार विफलता दिखाई है। ट्रिब्यूनल में जमा दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया और आंशिक भुगतान भी किया, लेकिन पूरा बकाया चुकाने में असफल रही।
ऑपरेशनल लेनदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. बालासुब्रमण्यम, अधिवक्ता आदित्य भारत मनुबरवाला और अमोघ सिंहा ने पैरवी की। उन्होंने ट्रिब्यूनल को बताया कि जनवरी 2025 में कंपनी को डिमांड नोटिस भेजा गया था, लेकिन कंपनी ने उसका कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया।
हालांकि, लेनदारों ने यह भी स्वीकार किया कि कंपनी ने बकाया राशि का एक हिस्सा चुका दिया है और अपने कर्ज को स्वीकार भी किया है। इसके बावजूद शेष राशि का भुगतान नहीं होने के कारण नादारी कार्यवाही की मांग की गई है।
NCLT चेन्नई ने मामले में नोटिस जारी कर दिया है, जिसे कंपनी की ओर से अधिवक्ता रोशन ने स्वीकार किया। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
यदि ट्रिब्यूनल इस याचिका को स्वीकार कर लेता है, तो कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हो सकती है। इस प्रक्रिया के तहत एक अंतरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) नियुक्त किया जाएगा, जो कंपनी के संचालन और वित्तीय पुनर्गठन की निगरानी करेगा। इसका असर कंपनी के संचालन, लेनदारों और निवेशकों पर पड़ सकता है।
यह मामला पोलिमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स के वित्तीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नादारी प्रक्रिया शुरू होने से कंपनी के प्रबंधन और नियंत्रण में बड़ा बदलाव संभव है।
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