राजकोट शहर भाजपा के नवनियुक्त उपाध्यक्ष Somabhai Bhaliya का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान माता जी के मंडप में भक्ति भाव से धूणते हुए और अपनी पीठ पर सांकल मारते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में श्रद्धा और अंधविश्वास को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।
वीडियो वायरल होने के बाद सोमाभाई भालिया ने मीडिया के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह वीडियो तीन से चार महीने पुराना है और यह उनके ससुराल में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम का है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं कोई भुवा (ओझा) नहीं हूं और न ही अंधविश्वास फैलाने का काम करता हूं। यह मेरी निजी आस्था से जुड़ा विषय है। किसी के कहने पर श्रद्धा भाव से मैंने यह किया था, लेकिन मेरे विरोधी इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।”
इस पूरे मामले पर गुजरात भाजपा संगठन की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सोमाभाई भालिया एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जो वर्षों से सामाजिक और धार्मिक सेवा से जुड़े हुए हैं। भाजपा के अनुसार, वीडियो में वह केवल भक्ति में लीन दिखाई देते हैं और उनके खिलाफ अंधविश्वास को बढ़ावा देने को लेकर कोई आधिकारिक शिकायत या फीडबैक नहीं मिला है।
वहीं, इस वीडियो पर विज्ञान जथा के प्रमुख Jayantbhai Pandya ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले लोगों से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि देश जब विज्ञान और तर्क को बढ़ावा दे रहा है, तब इस तरह की घटनाएं गलत संदेश देती हैं।
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दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता Anilbhai Patel ने सोमाभाई भालिया का बचाव करते हुए कहा कि कई समाजों में ऐसी परंपराएं होती हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और अंधविश्वास के बीच एक पतली रेखा होती है और सोमाभाई व्यक्तिगत रूप से धार्मिक एवं सामाजिक सेवा करने वाले व्यक्ति हैं।
कुल मिलाकर, राजकोट में यह मामला केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में आस्था की भूमिका और उसकी सीमाओं पर एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
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