बाबा रामदेव का ट्रंप टैरिफ पर बड़ा बयान: अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार की अपील

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए जाने के फैसले का विरोध देश-विदेश में लगातार बढ़ रहा है। खुद अमेरिकी सांसद भी ट्रंप के इस कदम को गलत बताते हुए चेतावनी दे रहे हैं कि इससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ सकती है। इस बीच योग गुरु बाबा रामदेव ने ट्रंप टैरिफ का तोड़ बताते हुए भारतीयों से अमेरिकी कंपनियों और ब्रांडों का बहिष्कार करने की अपील की है।

अमेरिकी कंपनियों का बहिष्कार ही है जवाब: रामदेव

बाबा रामदेव ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि अमेरिकी टैरिफ “राजनीतिक धौंस, गुंडागर्दी और तानाशाही” है। उन्होंने भारतीय नागरिकों से अपील की कि वे पेप्सी, कोका-कोला, केएफसी, मैकडॉनल्ड्स, सबवे, नाइकी और एप्पल जैसी अमेरिकी कंपनियों से दूरी बनाएं। उनका कहना है कि अगर भारतीय व्यापक स्तर पर इन ब्रांडों का बहिष्कार करते हैं तो अमेरिका में अराजकता फैल जाएगी और ट्रंप को मजबूर होकर अपने फैसले वापस लेने होंगे।

“एप्पल शोरूम पर कोई भारतीय न दिखे”

रामदेव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और जब तक ट्रंप अपने फैसले से पीछे नहीं हटते, तब तक देशभक्त भारतीयों को अमेरिकी उत्पादों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा—
“इस वक्त कोई भी अमेरिकी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा है, वह देश के साथ धोखा कर रहा है। यह आर्थिक आजादी की लड़ाई है और अपमान का बदला मिलकर लेना होगा।”

“डॉलर की दादागिरी खत्म करनी होगी”

बाबा रामदेव ने ट्रंप पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार को छेड़कर गलती की है। अगर भारत रूस, चीन, यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों के साथ नया गठबंधन बना लेता है, तो डॉलर की ताकत आधी हो जाएगी।
उन्होंने कहा— “डॉलर की ताकत महज उसकी जबरदस्ती है। यह लोकतंत्र नहीं बल्कि आर्थिक गुंडागर्दी है। भारत को दुश्मन से दुश्मन की तरह ही व्यवहार करना होगा।”

स्वदेशी का दिया संदेश

रामदेव ने “स्वदेशी” की परिभाषा बताते हुए कहा कि इसका अर्थ है—

  1. भारत में निर्मित उत्पाद
  2. भारतीय पूंजी से विश्व के लिए तैयार सामान
  3. स्वदेश की अर्थव्यवस्था, कृषि, शिक्षा, चिकित्सा और संस्कृति का गौरव

उन्होंने कहा कि भारत को नए कीर्तिमान गढ़ने होंगे ताकि पूरी दुनिया यहां से शिक्षा, चिकित्सा और ऑर्गैनिक कृषि सीखने आए। साथ ही भारत को चीन की तरह मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।