चीन के तियानजिन शहर में शुरू हुए 25वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में भारत और चीन के रिश्तों में नई ऊर्जा का संकेत मिला। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक स्तर पर सभी की निगाहें खींचीं। यह मुलाकात खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि 2020 की गलवान झड़प के बाद दोनों नेताओं की यह सबसे महत्वपूर्ण बातचीत रही।
सात साल बाद मोदी की चीन यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी की यह सात साल बाद चीन यात्रा है। बैठक करीब 55 मिनट तक चली, जिसमें दोनों नेताओं ने सीमा विवाद, सीधी उड़ानें, कैलाश मानसरोवर यात्रा और आपसी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
मोदी-शी बैठक की बड़ी बातें
1. सीमा विवाद को पीछे छोड़ने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन को आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्ते आगे बढ़ाने चाहिए। वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि सीमा विवाद रिश्तों को परिभाषित नहीं करना चाहिए।
2. सीधी उड़ानें और कैलाश मानसरोवर यात्रा
मोदी ने घोषणा की कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू होंगी। साथ ही, कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण रुकी हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा भी दोबारा शुरू होगी।
3. हाथी और ड्रैगन साथ-साथ
शी जिनपिंग ने कहा कि “हाथी और ड्रैगन का साथ चलना जरूरी है।” उन्होंने भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए कहा कि दोनों देशों को ग्लोबल साउथ, बहुपक्षवाद और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
4. विकास साझेदार, प्रतिद्वंद्वी नहीं
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं। उनके मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
5. तीसरे देश के नजरिए से न देखें संबंध
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों रणनीतिक स्वायत्तता का पालन करते हैं और उनके रिश्तों को किसी तीसरे देश की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
विदेशी मीडिया और वैश्विक प्रतिक्रिया
विदेशी मीडिया ने मोदी-शी मुलाकात को एशियाई राजनीति और वैश्विक कूटनीति में बड़ा मोड़ करार दिया है। विश्लेषकों के अनुसार यह कदम भारत-चीन के बीच भरोसे का माहौल बनाने और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
ब्रिक्स समिट का न्योता
पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया। चीन ने भी भारत की अध्यक्षता को समर्थन देने की घोषणा की।

