अमेरिका-ईरान के बीच फिर न्यूक्लियर डील पर बातचीत, जिनेवा में अहम बैठक

अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील पर जिनेवा में अहम बैठक। प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान लचीलापन दिखाने को तैयार।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी न्यूक्लियर विवाद को सुलझाने के लिए एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक को संभावित न्यूक्लियर समझौते की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देता है, तो वह अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम में लचीलापन दिखाने के लिए तैयार है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, संभावित समझौते से दोनों देशों को आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। इसमें तेल-गैस क्षेत्र, खनन उद्योग और अन्य निवेश क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं शामिल हो सकती हैं।

इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ अपनी रणनीतिक तैयारियों को भी मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मध्य-पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है, ताकि यदि बातचीत विफल हो जाए तो अन्य विकल्प भी खुले रहें।

Iran says potential energy, mining and aircraft deals on table in talks with US

दूसरी ओर, ईरान ने साफ किया है कि वह पूरी तरह से यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) बंद नहीं करेगा। हालांकि, यदि प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो वह उच्च स्तर के यूरेनियम संवर्धन को कम करने पर विचार कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन वार्ताओं का परिणाम वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है, तो इससे वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता आ सकती है और क्षेत्रीय तनाव भी कम हो सकता है। वहीं, यदि बातचीत असफल रहती है, तो इससे तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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