उपराष्ट्रपति चुनाव: सी.पी. राधाकृष्णन की बड़ी जीत, 14 अतिरिक्त वोटों ने बढ़ाई चर्चा

नई दिल्ली:
उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित हो गए, जिसमें एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन विजयी रहे। उन्होंने कुल 452 वोट हासिल किए, जबकि एनडीए खेमे के पास केवल 427 सांसदों के वोट थे। जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के 11 सांसद पहले ही एनडीए को समर्थन दे रहे थे, इसके बावजूद राधाकृष्णन को मिले अतिरिक्त 14 वोट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। भाजपा का दावा है कि विपक्षी खेमे से कई सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की है।

राज्यसभा के महासचिव एवं निर्वाचन अधिकारी पी.सी. मोदी ने बताया कि इस बार मतदान का प्रतिशत 98.2% रहा। चुनाव में बीजू जनता दल (बीजद), भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने हिस्सा नहीं लिया।

राजनीतिक मायने

जुलाई में जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद हुए इस चुनाव में भाजपा ने तमिलनाडु से अपनी मजबूत पहचान रखने वाले नेता सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया। भाजपा का यह दांव द्रविड़ राजनीति पर असर डालने की रणनीति माना जा रहा था। इसके जवाब में विपक्षी गठबंधन INDIA ने तेलुगु समुदाय से आने वाले पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा।

हालांकि, नतीजों से साफ है कि क्षेत्रीय एकजुटता की बजाय विचारधारा की राजनीति इस चुनाव में निर्णायक साबित हुई। भाजपा का दावा है कि इस परिणाम ने राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत को स्पष्ट कर दिया है।

दक्षिण भारत में भाजपा की चुनौती

विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भाजपा के लिए अभी भी जमीन मजबूत करना आसान नहीं है।

  • केरल: अल्पसंख्यक समुदायों की बहुलता भाजपा के लिए चुनौती।
  • तमिलनाडु: उत्तर विरोधी भावनाएं भाजपा की राह में अवरोध।

इसके बावजूद, इस जीत को भाजपा दक्षिण भारत में अपने लिए संभावित राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है।

राधाकृष्णन का बयान

जीत के बाद सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा:
“अगर हमें 2047 तक एक विकसित भारत बनाना है, तो हमें राजनीति से ऊपर उठकर विकास पर ध्यान देना होगा। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। इस पद पर रहते हुए मैं लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित का ध्यान रखूंगा।”