
\अहमदाबाद से द्वारकाधीश के दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे मंत्रालय ने अहमदाबाद-ओखा वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, ट्रेन के समय, रूट, स्टॉपेज और संचालन के दिनों में बदलाव किया गया है। इन परिवर्तनों का सबसे अधिक लाभ पश्चिम अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत ट्रेन संख्या 22925/22926 अहमदाबाद-ओखा वंदे भारत एक्सप्रेस अब अहमदाबाद (कालूपुर) स्टेशन के बजाय साबरमती जंक्शन से संचालित होगी। ट्रेन का प्रस्थान और आगमन दोनों अब साबरमती जंक्शन पर ही होगा। इससे यात्रियों को शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
नए समय के अनुसार, साबरमती-ओखा वंदे भारत एक्सप्रेस सुबह 6:15 बजे साबरमती जंक्शन से रवाना होगी और दोपहर 1:20 बजे ओखा पहुंचेगी। वहीं वापसी में ट्रेन ओखा से शाम 4:45 बजे रवाना होकर रात 11:15 बजे साबरमती जंक्शन पहुंचेगी।

रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आंबली रोड और साणंद स्टेशन पर भी ट्रेन का ठहराव निर्धारित किया है। इससे बोपल, घुमा, शीलज, घाटलोडिया, साणंद और पश्चिम अहमदाबाद के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। अब उन्हें कालूपुर स्टेशन तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
रेलवे बोर्ड ने ट्रेन के संचालन दिनों में भी बदलाव किया है। पहले दोनों दिशाओं की सेवाएं अलग-अलग दिनों में बंद रहती थीं, लेकिन अब वंदे भारत एक्सप्रेस केवल मंगलवार को बंद रहेगी और सप्ताह के बाकी छह दिनों में नियमित रूप से संचालित होगी।
हालांकि, नई समय-सारिणी के कारण द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी हो गई है। ट्रेन द्वारका स्टेशन पर लगभग दोपहर 12:30 बजे पहुंचती है, जबकि द्वारकाधीश मंदिर दोपहर 1:00 बजे दर्शन के लिए बंद हो जाता है। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग 2 से 3 किलोमीटर है, जिससे यात्रियों के लिए इतने कम समय में मंदिर पहुंचकर दर्शन करना कठिन हो सकता है।
दूसरी ओर, मंदिर शाम 5:00 बजे पुनः खुलता है, लेकिन उसी समय वापसी की वंदे भारत ट्रेन द्वारका स्टेशन से रवाना होने की तैयारी में होती है। ऐसे में एक ही दिन में द्वारका जाकर लौटने की सुविधा तो मिलेगी, लेकिन द्वारकाधीश के दर्शन करना यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
रेलवे के इस निर्णय से यात्रा सुविधाजनक और तेज जरूर होगी, लेकिन श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अतिरिक्त योजना बनानी पड़ सकती है।
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