Bhupendra Patel के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने किसानों और आम जनता के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में अब पारिवारिक वारिसों के बीच खेती की जमीन के आंतरिक लेन-देन पर केवल ₹300 की टोकन स्टाम्प ड्यूटी लागू की जाएगी।
गांधीनगर में मुख्यमंत्री ने यह निर्णय समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों, किसान संगठनों और कृषि समुदाय की मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस फैसले के तहत सीधी और आड़ी दोनों प्रकार की वारिस रेखा में आने वाले परिवारजनों के बीच जमीन के अधिकार हस्तांतरण, नाम दर्ज कराने और हिस्सेदारी (विभाजन) जैसे मामलों में अब जंत्री आधारित भारी स्टाम्प ड्यूटी नहीं लगेगी।
सरकार ने यह राहत Gujarat Stamp Act 1958 की धारा 9 के अंतर्गत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दी है। इसके अनुसार, वारिसों के बीच एक या अधिक चरणों में होने वाले हक हस्तांतरण, नाम दर्ज करने और जमीन के बंटवारे के प्रत्येक दस्तावेज पर केवल ₹300 की स्टाम्प ड्यूटी ली जाएगी।
इस फैसले से परिवारों के भीतर संपत्ति विवादों में कमी आएगी और कानूनी दस्तावेजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। पहले अधिक स्टाम्प ड्यूटी के कारण कई लोग बिना दस्तावेज के ही लेन-देन करते थे, जिससे भविष्य में विवाद खड़े होते थे।
अब इस नई व्यवस्था से किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा, जमीन के रिकॉर्ड (Record of Rights) अधिक स्पष्ट होंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, जमीन से जुड़े मामलों में प्रक्रिया तेज और आसान होगी, जिससे ‘Ease of Doing Business’ को भी बढ़ावा मिलेगा।
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