
पंचमहल जिले में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सुजलाम सुफलाम योजना के तहत बड़े पैमाने पर मिट्टी चोरी और अवैध खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि खनन माफिया योजना के नाम पर निर्धारित अनुमति से दो से तीन गुना अधिक मिट्टी निकालकर उसे स्थानीय बिल्डरों और निजी परियोजनाओं को बेच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में वर्तमान में 55 तालाबों को गहरा करने और 435 चेकडैमों की सफाई का कार्य चल रहा है। इन विकास कार्यों की आड़ में अवैध खनन का संगठित नेटवर्क सक्रिय हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जितनी मात्रा में मिट्टी निकालने की अनुमति दी जाती है, उससे कहीं अधिक मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है और उसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
आरोप यह भी है कि खनन माफिया निर्धारित सीमा से अधिक गहराई तक खुदाई कर रहे हैं, जिससे सरकारी गोचर भूमि को भी नुकसान पहुंच रहा है। इससे पर्यावरण और सरकारी संपत्ति दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
मामले में हालोल ग्रामीण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अवैध खनन में इस्तेमाल की जा रही कुछ मशीनों और वाहनों को जब्त किया है तथा कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि, पूरे मामले में संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
पानम सिंचाई विभाग का कहना है कि उन्हें अब तक इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, जबकि खनन एवं खनिज विभाग का दावा है कि वह नियमित निगरानी करता है और निर्धारित मात्रा से अधिक मिट्टी नहीं निकाली जाए, इसकी सावधानी रखी जाती है।
इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियां जारी रहने से विभागीय दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर नाराजगी देखी जा रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
ये भी पढ़ें: गांधीनगर में FABEXA-11 प्रदर्शनी का शुभारंभ, गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग को मिलेगा नया विस्तार