
गुजरात में इस समय मौसम ने अचानक करवट ले ली है। जहां एक ओर अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ तेज गर्मी पड़ने की उम्मीद की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने राज्य में आंधी, तेज हवाओं और गाज-वीज के साथ बारिश की चेतावनी जारी की है। यह बदलाव सामान्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक साथ सक्रिय हुई तीन प्रमुख मौसम प्रणालियां जिम्मेदार हैं। इन प्रणालियों के कारण राज्य के कई हिस्सों में 1 अप्रैल से 4 अप्रैल तक मौसम अस्थिर रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान और कच्छ के आसपास सक्रिय है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्व राजस्थान के ऊपर एक अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। तीसरी महत्वपूर्ण प्रणाली के रूप में एक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस पश्चिमी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इन तीनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से गुजरात के वातावरण में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है।
इन प्रणालियों के कारण अरब सागर से नमी युक्त हवाएं गुजरात की ओर खिंच रही हैं। यही कारण है कि राज्य में बादल छाए रहने के साथ-साथ बारिश की संभावना बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जिससे कई स्थानों पर आंधी जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसके अलावा, बिजली गिरने की घटनाओं की भी आशंका जताई गई है।
यदि जिलों की बात करें तो कच्छ, बनासकांठा, पाटण, साबरकांठा और मेहसाणा जैसे उत्तर गुजरात के जिलों में सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिल सकता है। सौराष्ट्र क्षेत्र के द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली और भावनगर में भी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं मध्य और दक्षिण गुजरात के वडोदरा, भरूच, छोटा उदयपुर, दाहोद, नर्मदा, सूरत और तापी जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।

मौसम विभाग के डायरेक्टर ए.के. दास के अनुसार, 1 अप्रैल को कच्छ, बनासकांठा, पाटण और द्वारका में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

2 अप्रैल को राज्य के अधिकांश हिस्सों में गाज-वीज के साथ बारिश की संभावना अधिक है।

3 अप्रैल को सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के जिलों में असर जारी रहेगा, जबकि

4 अप्रैल को दक्षिण और मध्य गुजरात में बारिश की संभावना बनी रहेगी।
यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। इस समय रबी फसलों की कटाई का समय चल रहा है। ऐसे में अचानक होने वाली बारिश और तेज हवाएं फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। खासकर गेहूं, जीरा और सरसों जैसी फसलें कटाई के बाद खुले में रखी जाती हैं, जो बारिश से खराब हो सकती हैं। इसके अलावा, मंडियों में रखी कृषि उपज के भी भीगने का खतरा है।
राज्य के कई किसान इस मौसम परिवर्तन से परेशान नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे साल की मेहनत का फल अब कटाई के समय खतरे में है। यदि बारिश होती है तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी कारण प्रशासन ने भी किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। विशेष रूप से बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, तेज हवाओं के कारण कमजोर ढांचे और अस्थायी निर्माण को भी नुकसान पहुंच सकता है।
दक्षिण गुजरात के जिलों में विशेष चेतावनी जारी की गई है, जहां 2 अप्रैल को तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश की संभावना अधिक है। वहीं सौराष्ट्र के समुद्री तटों पर भी अलर्ट जारी किया गया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि तेज हवाओं के कारण समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का स्वरूप लगातार बदल रहा है। अप्रैल जैसे गर्म महीने में इस तरह की बारिश असामान्य मानी जाती है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब गुजरात में कमोसम बारिश हुई हो, लेकिन इस बार तीन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह मौसम बदलाव लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण सर्दी-खांसी और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
प्रशासन और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
अंत में कहा जा सकता है कि गुजरात में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। जहां एक ओर यह बारिश गर्मी से राहत दे सकती है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।
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