
भारत में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन भुगतान सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में वैश्विक साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकथाम कंपनी बायोकैच (BioCatch) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर अपराध भारतीय बैंकों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं और इनके कारण वित्तीय नुकसान लगातार बढ़ रहा है।
सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत की लगभग 84 प्रतिशत बैंकों ने माना है कि धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि के कारण उन्हें पहले की तुलना में अधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 48 प्रतिशत बैंक हर वर्ष 83 करोड़ रुपये से अधिक की राशि साइबर फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी के कारण गंवा रहे हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि साइबर अपराधियों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 93 प्रतिशत वित्तीय क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि AI तकनीक ने साइबर अपराधों को पहले से कहीं अधिक उन्नत और जटिल बना दिया है। अपराधी अब AI की मदद से फर्जी पहचान तैयार कर रहे हैं, ग्राहकों की आवाज की नकल कर रहे हैं और अत्यधिक विश्वसनीय फिशिंग संदेश भेज रहे हैं। इससे बैंक ग्राहकों और संस्थानों दोनों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और अन्य इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। हालांकि, यही प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के लिए भी आसान लक्ष्य बनते जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल भुगतान से जुड़े अधिकांश धोखाधड़ी मामलों में UPI और त्वरित भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग ऐप, नकली ग्राहक सेवा कॉल और सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों के माध्यम से अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल तकनीकी सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। बैंकों को अपने साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ ग्राहकों को भी जागरूक बनाना होगा। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, व्यवहार आधारित पहचान प्रणाली, AI-संचालित फ्रॉड डिटेक्शन और नियमित सुरक्षा ऑडिट जैसे उपायों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता है।
वर्तमान समय में AI जहां बैंकिंग सेवाओं को अधिक स्मार्ट और सुविधाजनक बना रहा है, वहीं यह साइबर अपराधियों के लिए भी एक शक्तिशाली हथियार साबित हो रहा है। ऐसे में बैंकों, नियामक संस्थाओं और ग्राहकों को मिलकर डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में साइबर धोखाधड़ी का खतरा और अधिक बढ़ सकता है, जिससे देश की वित्तीय प्रणाली पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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