
बोटाद में घरेलू विवाद जैसी एक मामूली बात ने एक परिवार के टूटने की कगार पर पहुंचा दिया था, लेकिन पुलिस स्टेशन बेस्ड सपोर्ट सेंटर की समय पर हस्तक्षेप से यह रिश्ता फिर से जुड़ गया।
बोटाद जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र शर्मा और जिला महिला एवं बाल अधिकारी आई.आई. मंसूरी के मार्गदर्शन में संचालित इस सपोर्ट सेंटर ने एक बार फिर अपने उद्देश्य को सार्थक किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक महिला का विवाह लगभग तीन वर्ष पहले हुआ था और उसे एक छोटा बच्चा भी है। घर के काम को लेकर हुए छोटे विवाद ने धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लिया। पति और ससुराल पक्ष द्वारा लगातार मानसिक उत्पीड़न किया गया और अंततः महिला को ट्रेन में बैठाकर मायके भेज दिया गया।
बोटाद रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद पीड़िता ने अपनी पूरी स्थिति अपने परिजनों को बताई। इसके बाद परिजन उसे सीधे पुलिस स्टेशन बेस्ड सपोर्ट सेंटर लेकर पहुंचे, जहां काउंसलर रीना व्यास और रिंकल मकवाणा ने संवेदनशीलता के साथ उसकी बात सुनी और मानसिक सहारा दिया।
काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि छोटे बच्चे की देखभाल के कारण महिला को घर के काम में कठिनाई हो रही थी, लेकिन इस समस्या का समाधान निकालने के बजाय पति और ससुराल पक्ष ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। महिला ने यह भी बताया कि उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रही थी और वह सम्मान के साथ अपना वैवाहिक जीवन जीना चाहती थी।
सपोर्ट सेंटर द्वारा दोनों पक्षों को बुलाकर लगभग तीन बार सामूहिक बैठक आयोजित की गई। काउंसलिंग और कानूनी मार्गदर्शन के माध्यम से महिला के आत्मसम्मान, बच्चे के भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर गंभीर चर्चा की गई।
लगभग दो महीने के प्रयासों के बाद, दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और टूटता हुआ दांपत्य जीवन फिर से पटरी पर आ गया। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, छोटे बच्चे को दोबारा माता-पिता का संयुक्त स्नेह मिल सका।
दोनों परिवारों ने इस सकारात्मक पहल के लिए सपोर्ट सेंटर का आभार व्यक्त किया और इसे समाज के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया।
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