
अहमदाबाद: डीपीएस बोपाल, अहमदाबाद में ‘विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस’ का आयोजन बड़े उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में ज्ञान, साहित्य और कल्पनाशक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना, उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना और साहित्य के प्रति गहरी रुचि उत्पन्न करना था।
इस विशेष आयोजन की प्रमुख आकर्षण रहीं प्रसिद्ध लेखिका सुश्री पूजा सरण, जिन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें साहित्य, संचार कौशल और आत्म-विकास के विभिन्न आयामों से परिचित कराया। सुश्री सरण एक प्रतिष्ठित कम्युनिकेशन कोच, माइंडसेट ट्रेनर और सॉफ्ट-स्किल्स विशेषज्ञ हैं। उनके अनुभव और विचारों ने छात्रों को न केवल प्रेरित किया, बल्कि उन्हें अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने और विकसित करने की दिशा भी दिखाई।
कार्यक्रम की शुरुआत जूनियर कक्षाओं के लिए आयोजित कहानी सत्रों से हुई, जिसमें सुश्री सरण ने बच्चों को रोचक और शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से कल्पनाशक्ति और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया। बच्चों ने इन कहानियों को बड़े ध्यान और उत्साह के साथ सुना और अपनी प्रतिक्रियाओं के माध्यम से अपनी समझ का प्रदर्शन किया।
सीनियर विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंटरैक्टिव सेशन में सुश्री सरण ने लेखन कला, भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने और प्रभावी संवाद की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि कैसे वे अपने विचारों को सशक्त ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं और लेखन को अपने व्यक्तित्व विकास का माध्यम बना सकते हैं। इस सत्र ने छात्रों को आत्म-खोज और रचनात्मकता के नए आयामों से परिचित कराया।
प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 और 2) के छात्रों ने क्लास लाइब्रेरी की पुस्तकों में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने समूह चर्चा के माध्यम से अपनी पसंदीदा कहानियों को साझा किया और पुस्तकों की देखभाल के महत्व को समझा। यह गतिविधि न केवल उनके पठन कौशल को बढ़ाने में सहायक रही, बल्कि उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हुई।
कक्षा 3 से 5 के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रोचक पठन गतिविधियों का आयोजन किया गया। उन्होंने अपनी पसंदीदा पुस्तकों पर विचार साझा किए और साहित्यिक पात्रों को पत्र लिखकर अपनी कल्पनाशक्ति का सुंदर प्रदर्शन किया। इस प्रकार की गतिविधियों ने छात्रों को साहित्य से जोड़ने के साथ-साथ उनकी लेखन क्षमता को भी निखारा।
माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं (कक्षा 6 से 12) के छात्रों के लिए कई रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें बुकमार्क बनाना, साइलेंट कॉमिक स्ट्रिप तैयार करना, पुस्तक प्रस्तुति, बुक कवर डिजाइनिंग और चरित्र चित्रण शामिल थे। इसके अलावा ‘DEAR’ (Drop Everything And Read) सत्र ने छात्रों को कुछ समय के लिए सभी गतिविधियों को छोड़कर केवल पढ़ने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया। यह पहल छात्रों के बीच पढ़ने की आदत को मजबूत करने में अत्यंत प्रभावी साबित हुई।
इन सभी गतिविधियों ने छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने, अपनी कल्पनाओं को अभिव्यक्त करने और साहित्य के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का वातावरण पूरी तरह से साहित्यिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम का समापन अत्यंत उत्साह और संतोष के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने न केवल नई चीजें सीखीं, बल्कि पुस्तकों के साथ एक गहरा भावनात्मक संबंध भी स्थापित किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि यदि सही दिशा और प्रेरणा दी जाए, तो विद्यार्थी न केवल पढ़ने में रुचि विकसित कर सकते हैं, बल्कि उसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा भी बना सकते हैं।
डीपीएस बोपाल का यह प्रयास न केवल एक शैक्षणिक गतिविधि था, बल्कि यह विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि पुस्तकों का महत्व केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जीवन को समझने और संवारने का एक सशक्त माध्यम भी हैं।
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