
गांधीनगर, 25 जून। 26 जून को विश्वभर में ‘अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ विरोधी दिवस’ मनाया जाता है। इस अवसर पर गुजरात पुलिस ने राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में अपनी उपलब्धियों और रणनीतियों को सामने रखा है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस ने पिछले पाँच वर्षों में ड्रग्स के अवैध कारोबार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
राज्य पुलिस के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में 13,600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 1.36 लाख किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। इस दौरान ड्रग्स तस्करी और अवैध व्यापार से जुड़े 3,700 से अधिक मामले दर्ज किए गए तथा 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इन कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।
उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा कि गुजरात पुलिस की सख्त कार्रवाई के कारण अब ड्रग माफिया गुजरात के रास्ते अन्य राज्यों तक नशीले पदार्थ पहुँचाने से भी डरने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ड्रग्स के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
राज्य पुलिस महानिदेशक श्री जी. एस. मलिक ने बताया कि गुजरात सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अभियान को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक सामाजिक मिशन का रूप दिया है। राज्य में ड्रग्स की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक, विशेष टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस तंत्र को सशक्त बनाया गया है।
गुजरात देश का पहला राज्य बन गया है जिसने ‘ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी’ लागू की है। इस नीति के तहत ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ करने वाले पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और महत्वपूर्ण सूचना देने वाले नागरिकों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता है। इसके अलावा, अपनी जान जोखिम में डालकर बड़े ड्रग रैकेट का पर्दाफाश करने वाले पुलिसकर्मियों को ‘आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन’ देने की व्यवस्था भी की गई है।
ड्रग्स अपराधों की जांच को और प्रभावी बनाने के लिए गुजरात पुलिस ने एआई आधारित ‘एनएआरआईटी’ सॉफ्टवेयर विकसित किया है। यह प्रणाली अपराधियों की प्रोफाइलिंग, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पहचान, वित्तीय लेन-देन की निगरानी और डिजिटल नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
राज्य सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ रणनीतिक कार्रवाई के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) का गठन किया है। साथ ही अब स्थानीय पुलिस थानों को भी नारकोटिक्स मामलों की सीधी जांच और कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में माइक्रो-लेवल एंटी-नारकोटिक्स सेल स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है।
उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना भी है। इसके लिए नशामुक्ति केंद्रों को अधिक आधुनिक और सशक्त बनाया जा रहा है तथा युवाओं को काउंसिलिंग और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
गुजरात पुलिस की आक्रामक रणनीति, तकनीक का प्रभावी उपयोग और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति आज देशभर के लिए एक मॉडल बनकर उभरी है। राज्य लगातार ‘ड्रग-फ्री गुजरात’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
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