
पश्चिम बंगाल के सियासी रण में भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ दिल्ली, बल्कि ढाका की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है! बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तीस्ता नदी के पानी को लेकर एक बड़ी उम्मीद जगाई है।
बड़ी बातें जो आपका ध्यान खींच लेंगी:- हवाओं का रुख बदला, जागी नई आस! :
खलीलुर रहमान का मानना है कि ममता बनर्जी के हटने के बाद अब तीस्ता जल संधि पर जमी बर्फ पिઘल सकती है। उन्होंने संकेत दिया है कि अब बातचीत की मेज पर नए सिरे से विचार करना मुमकिन है।
ममता का वो ‘ऐतिहासिक वीटो’ :-
याद रहे, 2011 में जब तत्कालीन PM मनमोहन सिंह समझौता करने ही वाले थे, तब ममता बनर्जी के अड़ंगे ने पूरे खेल को बिगाड़ दिया था। अब वह रुकावट इतिहास बन चुकी है!
चीन की ‘चालाकी’ पर लगेगी लगाम?
जब भारत के साथ बात नहीं बनी, तो बांग्लादेश “तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट” के लिए चीन की शरण में चला गया था। क्या अब भारत अपनी कूटनीति से चीन को बाहर का रास्ता दिखाएगा?
फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ मोड :
बांग्लादेश अभी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। उनका कहना है— “हम किसी का मन नहीं पढ़ सकते, भाजपा की नई सरकार के गठन और उनके रुख का इंतजार है।”
क्या पश्चिम बंगाल में ‘कमल’ खिलने से बांग्लादेश की प्यास बुझेगी? यह समझौता सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की पूरी राजनीति का रुख मोड़ने वाला साबित हो सकता है!