
संकट में इराक का ‘मास्टर स्ट्रोक’
बंपर डिस्काउंट: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल न बिक पाने के कारण इराक ने प्रति बैरल 33 डॉलर की भारी छूट देने का फैसला किया है।
मुश्किल शर्त:
इराक की शर्त यह है कि तेल खरीदने वाले देश को अपनी रिस्क पर इराक के बंदरगाहों तक जहाज लाने होंगे।
क्या है सबसे बड़ा जोखिम?
होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पर युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में बीमा कंपनियां इन जहाजों का इंश्योरेंस नहीं कर रही हैं। अगर कोई देश इराक से तेल लेता है और रास्ते में जहाज पर हमला होता है, तो पूरा नुकसान उस खरीदार देश का होगा।
सस्ता तेल या मौत का कुआं? इराक की मुश्किल शर्त
खतरनाक रास्ता:
इराक से $33 सस्ता तेल लेने के लिए जहाजों को ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से गुजरना होगा। यह इलाका इस वक्त युद्ध का मैदान बना हुआ है।
ट्रंप का बड़ा फैसला:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को निकालने के लिए चल रहे सैन्य ऑपरेशन को फिलहाल रोक दिया है। इससे वहां फंसे जहाजों की सुरक्षा पर और भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
बीमा का संकट:
इस रास्ते पर लगातार हो रहे हमलोंऔर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती झड़पों के कारण बीमा कंपनियाँ जहाजों का इंश्योरेंस नहीं कर रही हैं। अगर कोई देश तेल उठाता है, तो जहाज और क्रू की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उसकी अपनी होगी
भारत का तेल बैकअप: कितने दिन सुरक्षित?
कुल उपलब्धता (Total Reserves): यदि रणनीतिक भंडार और तेल कंपनियों के पास मौजूद कमर्शियल स्टॉक को मिला दिया जाए, तो भारत के पास लगभग 74 दिनों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल भंडार है
वर्तमान स्टॉक कवर:
वर्तमान में ये रणनीतिक भंडार अपनी पूरी क्षमता का लगभग 64% (करीब 3.37 MMT) ही भरे हुए हैं。 इसका मतलब है कि मौजूदा संकट की स्थिति में, केवल यह सरकारी स्टॉक लगभग 5-6 दिनों तक का सहारा दे सकता है。