
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 8 मई को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी दबाव देखने को मिला। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बीएसई सेंसेक्स करीब 400 अंकों यानी 0.50 फीसदी की गिरावट के साथ 77,450 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी भी 130 अंकों की कमजोरी के साथ 24,200 तक फिसल गया।
आज के कारोबार में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। कई प्रमुख बैंकिंग और ऑटो कंपनियों के शेयर दबाव में रहे, जिससे बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ। हालांकि, फार्मा और आईटी सेक्टर में निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते इन सेक्टरों ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने की कोशिश की।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई इंडेक्स 660 अंक यानी 1.05 फीसदी टूटकर कारोबार करता नजर आया। वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 335 अंकों की गिरावट के साथ नीचे आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी करीब 75 अंक गिरा। एशियाई बाजारों में आई इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।
अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार, 7 मई को कमजोरी रही थी। डाउ जोन्स 314 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी आने से दुनियाभर के निवेशकों में सतर्कता बढ़ी हुई है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII/FPI की बिकवाली भारतीय बाजार पर लगातार दबाव बना रही है। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 341 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 441 करोड़ रुपये की खरीदारी की। पिछले 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 6,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जबकि पिछले 30 दिनों में यह आंकड़ा 39,164 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। दूसरी ओर घरेलू निवेशक लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं।
इससे पहले गुरुवार, 7 मई को भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 114 अंक टूटकर 77,845 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 4 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,327 पर बंद हुआ। उस दिन ऑटो और रियल्टी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली थी, जबकि FMCG सेक्टर दबाव में रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।