
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 17 जून को निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। घरेलू और वैश्विक सकारात्मक संकेतों के बीच बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार किया और दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 347 अंकों की बढ़त के साथ 77,156 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 97 अंक मजबूत होकर 24,086 के स्तर पर पहुंच गया।
कारोबार के दौरान निवेशकों ने आईटी, मेटल, सरकारी बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में जमकर खरीदारी की। इन क्षेत्रों में आई तेजी ने पूरे बाजार को मजबूती प्रदान की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों की उम्मीद, विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
आईटी सेक्टर में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। इसके अलावा धातु (मेटल) कंपनियों के शेयरों में भी मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर धातुओं की मांग में सुधार और कीमतों में स्थिरता का लाभ इस सेक्टर को मिला। वहीं सरकारी बैंकों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ने से बैंकिंग इंडेक्स को भी मजबूती मिली।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। घरेलू मांग में सुधार और आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए निवेशकों ने इस क्षेत्र में भरोसा जताया। बाजार में व्यापक खरीदारी के कारण अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए।
विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, नियंत्रित महंगाई और सरकार द्वारा जारी विकासोन्मुख नीतियां शेयर बाजार के लिए सकारात्मक माहौल बना रही हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी भी बाजार को लगातार समर्थन दे रही है।
हालांकि, विश्लेषकों ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों से जुड़े फैसलों और भू-राजनीतिक घटनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।
कुल मिलाकर, 17 जून का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए सकारात्मक रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया, जिससे बाजार में निवेशकों का विश्वास और मजबूत हुआ है। आने वाले दिनों में भी निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कॉर्पोरेट नतीजों और आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।
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