
गुजरात में 2026 के स्थानीय स्वराज्य चुनावों के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस बार मतदाताओं का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आया, जहां वर्षों से राजनीति में जमे दिग्गज नेताओं, पूर्व अधिकारियों और चर्चित चेहरों को जनता ने सीधा नकार दिया।
चुनाव में सबसे बड़ा झटका भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) तीनों प्रमुख दलों को लगा है। कई बड़े नाम, जिनकी जीत लगभग तय मानी जा रही थी, इस बार हार गए।
भाजपा की बात करें तो भूपत भायाणी, जो पहले AAP से विधायक रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे, उन्हें जूनागढ़ जिला पंचायत की भेंसाण सीट से हार का सामना करना पड़ा। वहीं, पूर्व IPS अधिकारी मनोज निनामा, जिन्होंने हाल ही में VRS लेकर भाजपा जॉइन की थी, वे भी अरवल्ली जिला पंचायत की ओड सीट से करीब 2700 वोटों से हार गए। इसके अलावा, मायाभाई आहीर की बेटी सोनल डेर भी चुनाव हार गईं।
कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव निराशाजनक रहा। क्रिकेटर रवींद्र जडेजा के परिवार से जुड़ी नयनाबा जाडेजा को राजकोट में हार का सामना करना पड़ा। वडोदरा में कांग्रेस की मजबूत नेता अमी रावत भी इस बार जीत नहीं सकीं। लगातार जीत दर्ज करने वाले बालासाहेब सूर्वे और वशराम सागठिया जैसे दिग्गजों को भी जनता ने नकार दिया।
इसके अलावा, कांग्रेस ने सेलिब्रिटी कार्ड खेलते हुए RJ आभा को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। गायत्रीबा वाघेला और अतुल राजाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं की हार ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर किया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए भी यह चुनाव बड़ा झटका लेकर आया। संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया और युवा नेता पायल साकरिया, जो पहले जीत हासिल कर चुके थे, इस बार जनता का विश्वास नहीं जीत सके।
इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि गुजरात की जनता अब पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर प्रदर्शन और विश्वसनीयता के आधार पर वोट दे रही है। यह परिणाम आने वाले बड़े चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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