
गुजरात की राजनीति में एक बार फिर एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिला है, जहां पुलिस कॉन्स्टेबल पृष्ठभूमि से आए नेताओं ने सफलता हासिल की है, जबकि कई पूर्व IPS अधिकारियों को हार का सामना करना पड़ा है।
Gujarat Local Elections 2026 के नतीजों में पूरे राज्य में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा देखने को मिला, लेकिन कुछ सीटों पर चौंकाने वाले उलटफेर भी सामने आए। अरवल्ली जिले की श्यामलाजी ओड सीट पर भाजपा उम्मीदवार और पूर्व IPS अधिकारी Manoj Ninama को हार का सामना करना पड़ा।
यह पहली बार नहीं है जब किसी उच्च पुलिस अधिकारी को राजनीति में असफलता मिली हो। इससे पहले भी Kuldeep Sharma, D. G. Vanzara और B. D. Vaghela जैसे कई बड़े नाम चुनावी मैदान में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सके।
इसके विपरीत, पुलिस कॉन्स्टेबल के रूप में करियर शुरू करने वाले नेताओं ने राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। C. R. Patil इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जो आज राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली नेता हैं। उनके अलावा जेठा भरवाड़, भवान भरवाड़ और Gopal Italia जैसे नाम भी राजनीति में सफल रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉन्स्टेबल स्तर के अधिकारी अपने कार्यकाल में जनता के अधिक संपर्क में रहते हैं, जिससे उनका ग्राउंड कनेक्शन मजबूत होता है। वहीं, उच्च अधिकारी अक्सर प्रशासनिक दायरे तक सीमित रहते हैं, जिसके कारण आम जनता से उनका सीधा जुड़ाव कम हो जाता है।
हालांकि, कुछ अपवाद भी मौजूद हैं। Jaspalsinh जैसे अधिकारी राजनीति में सफल रहे और मंत्री पद तक पहुंचे। वहीं P. C. Baranda ने शुरुआती असफलता के बाद खुद को स्थापित किया।
कुल मिलाकर, गुजरात की राजनीति में यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि जनसंपर्क और जमीनी पकड़ ही चुनावी सफलता की असली कुंजी है।
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