रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की दिशा और परिणाम को लेकर कोई भी निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता। पुतिन ने इस संकट की तुलना कोविड-19 महामारी से करते हुए चेतावनी दी कि इसके प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर पड़ सकते हैं।
मॉस्को में आयोजित एक बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा कि इस संघर्ष ने पहले ही वैश्विक सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और उत्पादन प्रणाली को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि हाइड्रोकार्बन, धातु और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
पुतिन ने कहा, “इस संघर्ष में शामिल देश भी यह नहीं बता सकते कि आगे क्या होने वाला है। यह संकट कोरोना महामारी की तरह ही वैश्विक विकास को धीमा कर सकता है।”
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने समझौता नहीं किया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव दिया है, जबकि ईरान ने इसके जवाब में अपनी पांच शर्तें रखी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.2 प्रतिशत बढ़कर 107.54 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 4.9 प्रतिशत बढ़कर 94.71 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। पेंटागन द्वारा अतिरिक्त सैनिकों और नौसैनिक बलों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। इसमें 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 1,000 सैनिकों के साथ-साथ मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की तैनाती भी शामिल है।
इसी बीच, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है, जिससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें अभी भी बनी हुई हैं। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट आने वाले समय में और गहरा सकता है।
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