
मुंबई, 8 जून। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। निवेशकों में बढ़ती चिंता और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली दर्ज की गई। कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 719 अंकों की गिरावट के साथ 73,524 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 244 अंक फिसलकर 23,123 के स्तर पर आ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके चलते विदेशी निवेशकों ने कई बाजारों में मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। पूरे दिन बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा, लेकिन अंतिम घंटों में बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
सोमवार के कारोबार में सबसे अधिक दबाव आईटी, मेटल और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। इन क्षेत्रों में हाल के दिनों में अच्छी तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। कई प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि धातु और रियल्टी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में बाजार पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे और बेहतर कॉर्पोरेट आय के कारण लंबी अवधि में बाजार की स्थिति सकारात्मक बनी रह सकती है। वर्तमान गिरावट को कई निवेशक खरीदारी के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय अपने निवेश लक्ष्यों और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें। बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच सतर्क निवेश रणनीति अपनाना समय की मांग है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक चिंताओं के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ और बाजार का माहौल दबाव में दिखाई दिया।
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