
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 9 जून को उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 4,398 दिनों तक शासन करने का रिकॉर्ड अब नरेंद्र मोदी और जवाहरलाल नेहरू के नाम संयुक्त रूप से दर्ज हो गया है। यदि प्रधानमंत्री मोदी 10 जून को भी अपने पद पर बने रहते हैं, तो वह इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले दूसरे नेता बन जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 मई 1952 को स्वतंत्र भारत के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद 27 मई 1964 को उनके निधन तक वह लगातार 4,398 दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहे। यह रिकॉर्ड पिछले कई दशकों से कायम था।
वहीं नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने अपनी पार्टी को जीत दिलाते हुए लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 9 जून 2026 तक प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल भी लगातार 4,398 दिनों का हो गया, जिससे उन्होंने नेहरू के इस लंबे समय से कायम रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता, मजबूत नेतृत्व क्षमता और लगातार तीन आम चुनावों में मिली सफलता को दर्शाती है। पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे, डिजिटल भारत, आत्मनिर्भर भारत, विदेशी निवेश और सामाजिक कल्याण योजनाओं जैसे कई क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कार्य किए हैं, जिनका प्रभाव देश और दुनिया में देखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के समर्थक इस उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रतीक मान रहे हैं। वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस रिकॉर्ड को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई नेताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी है।
10 जून का दिन भारतीय राजनीतिक इतिहास में विशेष महत्व रखेगा। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। यह उपलब्धि उन्हें स्वतंत्र भारत के इतिहास में लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में एक नई पहचान दिलाएगी।
भारतीय राजनीति के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाएगा, जहां दो अलग-अलग युगों के नेताओं के नाम एक ही रिकॉर्ड से जुड़े हैं। अब सभी की निगाहें 10 जून पर टिकी हैं, जब प्रधानमंत्री मोदी इस उपलब्धि को एक नए मुकाम तक पहुंचाएंगे।
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