
पाटन — राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय, पाटन का दीक्षांत समारोह 2026 अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि पाटन शिक्षा, कौशल, शिल्प और कला के लिए देशभर में विशिष्ट स्थान रखता है। सरस्वती नदी के पवित्र तट पर कभी हजारों ऋषि-मुनि तपस्या में लीन रहकर वेद-शास्त्र और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार करते थे। आज उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने वाला यह विद्याकेंद्र गर्व का प्रतीक है।
समारोह में उपस्थित महानुभावों के करकमलों से दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल की अनुमति के पश्चात विधिवत कार्यक्रम आरंभ हुआ। इस दीक्षांत समारोह में 9 विभिन्न संकायों के कुल 54,346 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पहली बार राज्यपाल के हस्ताक्षर वाली डिग्री प्रदान की गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के 151 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पाटन की ऐतिहासिक विद्यानगरी की पहचान पर गर्व और आनंद की भावना व्यक्त करते हुए हेमचंद्राचार्य को भारतीय जीवन मूल्यों के द्रष्टा के रूप में स्मरण किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे देश का भविष्य और आने वाले भारत के निर्माता हैं। आज के युग में प्रौद्योगिकी और विज्ञान तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में रुचि और जिज्ञासा विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसरो के वैज्ञानिक योगियों की तरह एकाग्रता और समर्पण से कार्य करते हैं, जो विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों से इसरो का दौरा करने का आग्रह भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों का जीवन दर्शन आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है। भौतिक सुख की दौड़ में मानवता को नहीं भूलना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से विश्व कल्याण और आत्म-कल्याण दोनों प्राप्त करने तथा मानवता को सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान उन्होंने विद्यार्थियों से किया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विद्यार्थियों से माता-पिता और गुरुजनों को देवतुल्य मानने, सत्याचरण करने, निरंतर ज्ञान अर्जित करने और उसे देश-विदेश में प्रसारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाग्य कर्म का फल होता है और महात्मा गांधी के जीवन मूल्यों को जीवन में उतारने का प्रयास प्रत्येक विद्यार्थी को करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देशहित में निरंतर कार्यरत हैं और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संकल्पित हैं। ऐसे में युवाओं को भी राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
कुलपति श्री के.सी. पोरिया ने स्वागत संबोधन में दीक्षांत समारोह को गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि डिग्री के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ती है। रजिस्ट्रार श्री आर.एन. देसाई ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस कार्यक्रम में इसरो के निदेशक श्री नीलेश देसाई, जिला कलेक्टर श्री तुषार भट्ट, जिला विकास अधिकारी श्री सी.एल. पटेल, जिला पुलिस अधीक्षक श्री वी.के. नायी सहित विभिन्न महाविद्यालयों के डीन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।