
रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अब तक करीब 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना में शामिल हुए थे, जिनमें से 49 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 139 भारतीय नागरिकों को भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के जरिए सुरक्षित वापस लाया गया है।
यह मामला उन याचिकाओं के बाद सामने आया, जिनमें परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को नौकरी और बेहतर भविष्य का लालच देकर रूस भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। कई लोग टूरिस्ट, स्टूडेंट और वैध वीजा पर रूस गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जानकारी दी कि रूस में भारतीय दूतावास लगातार प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है। सरकार ने बताया कि 6 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि 23 लोगों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से मृत भारतीयों के पार्थिव शरीरों को वापस लाने में देरी और खराब हालत में शव मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील और जटिल मानवीय तथा कूटनीतिक मामला है, इसलिए इसे सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और अन्य कानूनी सहायता देने पर विचार किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयास जारी रखे।
सरकार ने अदालत को बताया कि फरवरी 2024 से लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है, जिसमें भारतीय नागरिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी गई है। साथ ही, फर्जी एजेंटों और मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है, जो युवाओं को नौकरी का झांसा देकर रूस भेज रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
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