
भारत इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी और हीटवेव का सामना कर रहा है। शुक्रवार दोपहर जारी हुए वैश्विक मौसम आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। रियल-टाइम ग्लोबल वेदर ट्रैकिंग डेटा के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 97 शहर अकेले भारत के हैं। ओडिशा का बलांगीर 48°C तापमान के साथ देश और दुनिया का सबसे गर्म शहर बनकर सामने आया, जबकि बिहार का सासाराम और उत्तर प्रदेश का वाराणसी भी 47°C से अधिक तापमान के साथ सूची में शामिल रहे।
उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में गर्म हवाओं ने जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और ओडिशा सहित कई राज्यों में दोपहर के समय सड़कें सूनी दिखाई दे रही हैं। मौसम विभाग (IMD) ने 22 मई से 27 मई तक उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में ‘लू से भीषण लू’ की चेतावनी जारी की है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस रिकॉर्डतोड़ गर्मी के पीछे “हीट डोम” नामक वायुमंडलीय प्रणाली सबसे बड़ा कारण है। यह एक विशाल उच्च दबाव (High Pressure) वाला क्षेत्र है, जो गर्म हवा को ऊपर उठने नहीं देता और उसे वापस जमीन की ओर धकेल देता है। इससे हवा का तापमान तेजी से बढ़ता है और लगातार गर्मी जमा होती जाती है। इसके साथ ही पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाली सूखी और गर्म हवाएं इस स्थिति को और खतरनाक बना रही हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ भी कमजोर पड़ा है। सामान्यतः ये सिस्टम गर्मी के मौसम में बादल, हल्की बारिश और ठंडी हवाएं लाकर तापमान को नियंत्रित करते हैं, लेकिन इस वर्ष इनके कमजोर होने से गंगा के मैदानी इलाकों और मध्य भारत में तापमान असामान्य रूप से बढ़ गया है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि भारत के कई शहर “हीट आइलैंड” में बदल चुके हैं। तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल, हरित क्षेत्र में कमी, जल स्रोतों का सूखना और अवैध खनन जैसी गतिविधियों ने प्राकृतिक शीतलन व्यवस्था को पूरी तरह कमजोर कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र में हरित आवरण घटकर बेहद कम रह गया है, जिसके कारण जमीन सूर्य की गर्मी को अधिक मात्रा में सोख रही है।
भीषण गर्मी का असर स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। आंध्र प्रदेश में 1 मई से 19 मई के बीच हीट स्ट्रोक के 325 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, दस्त और गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रशासन ने लोगों को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय नुकसान और शहरीकरण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत में गर्मी का संकट और गंभीर हो सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजरें मानसून पर टिकी हैं, जो इस प्रचंड गर्मी से राहत दिलाने की सबसे बड़ी उम्मीद बना हुआ है।
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