
नई दिल्ली, 15 जून। भारतीय शेयर बाजार ने आज शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 76,450 के स्तर को पार कर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी करीब 350 अंकों की तेजी के साथ 23,900 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। लंबे समय से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। दोनों देशों के बीच सकारात्मक समझौते की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के प्रमुख शेयर बाजारों में उत्साह देखने को मिला, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के दाम कम होने से देश की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलता है। इससे आयात बिल में कमी आने की संभावना बढ़ती है और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।
आज के कारोबार में बैंकिंग, आईटी, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों में जोरदार खरीदारी देखी गई। निवेशकों ने वैश्विक संकेतों को सकारात्मक मानते हुए बड़े पैमाने पर निवेश किया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की सक्रियता भी बाजार की तेजी का एक प्रमुख कारण रही।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता का माहौल बना रहता है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले दिनों में भी मजबूती बनाए रख सकता है। हालांकि, निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
आज की तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में भी भारी बढ़ोतरी की है। बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जिससे निवेशकों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। विशेष रूप से खुदरा निवेशकों ने इस तेजी का भरपूर लाभ उठाया।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान शांति समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बाजार की यह मजबूती देश की आर्थिक संभावनाओं के प्रति निवेशकों के बढ़ते विश्वास को भी दर्शाती है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेश प्रवाह पर बनी रहेगी।
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