
आज आसमान पर पहुंचे सोना-चांदी के दाम:-
सोना-चांदी पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) बढ़ाए जाने के सरकार के फैसले के बाद आज 13 मई, बुधवार को सर्राफा बाजार में जबरदस्त विस्फोट देखा गया है। घरेलू कमोडिटी मार्केट खुलते ही सोने और चांदी (Gold-Silver) की कीमतों में करीब ₹30,000 तक का भारी उछाल दर्ज किया गया। चांदी रिकॉर्ड ₹18,000 की छलांग लगाकर ₹3 लाख के बिल्कुल करीब पहुंच गई है, जबकि सोना भी करीब ₹10,000 की तेजी के साथ ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम के नए शिखर पर जा पहुंचा है।
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, कीमती धातुओं में आई इस रिकॉर्ड तोड़ तेजी के पीछे सरकार द्वारा सोने के आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ में की गई बढ़ोतरी सबसे बड़ी वजह है। जाने-माने कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने स्पष्ट किया कि सोना-चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर देने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है। सोने और चांदी में आए इस करीब 6% के ताबड़तोड़ उछाल के पीछे यही एकमात्र मुख्य कारण है।
MCX पर कितना उछला सोना, चांदी में कितनी लगी आग?
MCX पर 3 जुलाई की डिलीवरी वाला सोना 6.19% या ₹9,503 के भारी उछाल के साथ ₹1,62,945 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं, 5 जून की डिलीवरी वाली चांदी 6.70% यानी ₹18,698 की तेजी के साथ ₹2,97,760 के ऐतिहासिक स्तर पर ट्रेड कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी की चाल :-
वैश्विक तनाव और अमेरिकी महंगाई के बीच बाजार में भारी हलचल इंटरनेशनल मार्केट में बुधवार को सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब कारोबार करता नजर आया। इसकी मुख्य वजह यह रही कि अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कहीं ज्यादा दर्ज किए गए, जिसने सर्राफा (बुलियन) कीमतों पर भारी दबाव बना दिया है। इन चौंकाने वाले आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी दिनों में ब्याज दरों में कटौती करने की तमाम संभावनाओं को लगभग सीमित कर दिया है।
अमेरिका में कंज्यूमर इन्फ्लेशन (उभोक्ता मुद्रास्फीति दर) अप्रैल महीने में बढ़कर 3.8% के स्तर पर पहुंच गई, जो बाजार के 3.7% के शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक है। यह मई 2023 के बाद का सबसे उच्चतम और रिकॉर्ड स्तर है। इस अप्रत्याशित उछाल का मुख्य कारण मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष की वजह से ऊर्जा और ईंधन की कीमतों में आ रही लगातार तेजी है।
इसी बीच, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भी लगातार तीसरे सत्र में जोरदार तेजी का रुख जारी रहा, क्योंकि अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने के तमाम राजनयिक प्रयास पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। इस गतिरोध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और महंगाई को लेकर चौतरफा चिंताओं को और गहरा कर दिया है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने भी अपने स्तर पर सोने की बेलगाम मांग को नियंत्रित करने और घरेलू मुद्रा (भारतीय रुपये) को मजबूत सहारा देने के लिए सोने और चांदी पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में भारी बढ़ोतरी कर दी है।