
देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां Arvind Kejriwal के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha के नेतृत्व में दो-तिहाई सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के दावों ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए 24 अप्रैल की देर रात Manish Sisodia और अरविंद केजरीवाल के बीच करीब 30 मिनट तक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी में आई टूट, इसके संभावित राजनीतिक प्रभाव और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब बगावत करने वाले सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के मूड में है। Sanjay Singh ने स्पष्ट किया कि पार्टी राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी।
पार्टी के राज्यसभा चीफ व्हिप एनडी गुप्ता द्वारा राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। फिलहाल इन तीन नेताओं पर ही औपचारिक शिकायत दर्ज की जाएगी, क्योंकि अन्य सांसदों ने अभी सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की पुष्टि नहीं की है।
गौरतलब है कि Raghav Chadha के साथ अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल के भी पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने की खबरों ने AAP के भीतर चल रही नाराजगी को उजागर कर दिया है।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया गया, जिसके बाद पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आए और अब यह बगावत के रूप में उभर चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले चुनावों में AAP की स्थिति को प्रभावित कर सकता है और पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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