
गांधीनगर: गुजरात की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने गांधीनगर में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म मामले में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी रामनीत देवनंदन रामरूप यादव (40 वर्ष) को उसके प्राकृतिक जीवन की आखिरी सांस तक सख्त उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि दोषी की मौत जेल के भीतर ही होनी चाहिए, और उसके बाद ही उसका शव परिजनों को सौंपा जाए। इसके साथ ही, पीड़ित बच्ची के पुनर्वास और सहायता के लिए 10 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
पुलिस और न्यायपालिका की मुस्तैदी के कारण इस पूरे मामले में घटना के महज 5 महीने और 10 दिन के भीतर ही न्याय देकर समाज में एक कड़ा उदाहरण पेश किया गया है।
10 दिनों की रेकी के बाद दिया था वारदात को अंजाम
दिल को दहला देने वाली यह घटना 15 दिसंबर 2025 की रात गांधीनगर के सेक्टर-24 स्थित इंदिरा नगर छापरा इलाके में हुई थी। मूल रूप से बिहार का रहने वाला आरोपी रामनीत यादव सेक्टर-25 GIDC में मजदूरी करता था। जब वह पास की एक किराना दुकान पर आता था, तब उसकी नजर इस मासूम बच्ची पर पड़ी। आरोपी ने इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने के लिए 10 दिन पहले से ही पूरी योजना बनाई थी और लगातार बच्ची के घर की रेकी कर रहा था। वारदात की रात वह चुपके से घर में घुसा और सो रही बच्ची का अपहरण कर उसे पास की झाड़ियों में ले गया, जहाँ उसने मासूम के साथ दरिंदगी की। इसके बाद वह बच्ची को मृत समझकर वहीं छोड़कर भाग गया था। हालांकि, होश में आते ही मासूम बच्ची बहादुरी दिखाते हुए लड़खड़ाते कदमों से अपने घर पहुँची और परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद इस पूरे पाप का भंडाफोड़ हुआ।
पुलिस पर हमला और 13 दिनों में चार्जशीट
घटना की शिकायत सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन में दर्ज होते ही पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। आरोपी अपने गृहनगर बिहार भागने की फिराक में था, लेकिन गांधीनगर जिला पुलिस प्रमुख (SP) रवि तेजा वासम शेट्टी के मार्गदर्शन में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और टेक्निकल सर्विलांस की मदद से महज 5 दिनों में उसे दबोच लिया।
जांच के दौरान जब पुलिस आरोपी को लेकर वारदात का री-कंस्ट्रक्शन (घटना का पुनरावृत्ति दृश्य) करने घटना स्थल पर गई, तो आरोपी ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करते हुए पुलिस टीम पर ही हमला कर दिया। पुलिस ने आत्मरक्षा और आरोपी को रोकने के लिए 3 राउंड फायरिंग की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे तुरंत सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद पुलिस ने दिन-रात एक करके FSL रिपोर्ट और पुख्ता वैज्ञानिक सबूत जुटाए और महज 13 दिनों के भीतर अदालत में जड़बेसलाक चार्जशीट पेश कर दी।
35 गवाहों की गवाही और स्पीडी ट्रायल
सरकारी वकील सुनील एस. पंड्या की धारदार दलीलों और अदालत के समक्ष पेश किए गए कुल 35 मजबूत गवाहों के आधार पर आरोपी का गुनाह पूरी तरह साबित हो गया। स्पेशल पॉक्सो जज एस. वी. शर्मा की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और पॉक्सो एक्ट, 2012 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी को दोषी माना। इस त्वरित न्याय (Speedy Trial) ने यह साफ संदेश दिया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराध करने वालों को कानून किसी भी कीमत पर बख्शेगा नहीं।
ये भी पढ़ें: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जन शिकायतों के त्वरित समाधान पर दिया जोर, किसानों की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश