
राजकोट महानगरपालिका में नए पदाधिकारियों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। भाजपा ने आगामी ढाई वर्षों के लिए डॉ. नेहल शुक्ल को शहर का 23वां मेयर नियुक्त किया है। वहीं, दक्षा वसाणी को डिप्टी मेयर और परेश पीपलिया को स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। इसके अलावा हिरेन खीमाणिया को शासक पक्ष का नेता और संजयसिंह राणा को दंडक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजकोट में पदाधिकारियों की नियुक्ति से पहले पूरे दिन राजनीतिक हलचल देखने को मिली। शहर संगठन और विधायकों के बीच कई दौर की बैठकों के बाद इन नामों पर अंतिम मुहर लगी। बंद कमरे में हुई चर्चाओं में कई संभावित नामों पर विचार किया गया था। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि इन नियुक्तियों के पीछे रूपाणी गुट का प्रभाव देखने को मिला है। अंजलीबेन रूपाणी, नितिन भारद्वाज और कश्यप शुक्ल समूह की सक्रिय भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज रहीं।
डॉ. नेहल शुक्ल ने मेयर पद संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि राजकोट महानगरपालिका में अनावश्यक खर्चों में कटौती की जाएगी। उन्होंने कहा कि वाहन खर्च समेत अन्य गैरजरूरी खर्चों की समीक्षा कर उन्हें कम करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही शहर में जहां मजबूत जल पाइपलाइन की आवश्यकता है, वहां जल्द काम शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में मितव्ययिता अपनाने की अपील के बाद गुजरात सरकार भी खर्चों में कटौती की दिशा में काम कर रही है और राजकोट महानगरपालिका भी इसी दिशा में कदम उठाएगी। डॉ. शुक्ल ने भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना उनकी टीम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। खासतौर पर अलग-अलग समाजों और शहर के विभिन्न क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने पर ध्यान दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लंबे समय से राजनीतिक रूप से निष्क्रिय माने जा रहे नेताओं की सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी रही।
ये भी पढ़ें: गुजरात में मौसम का बड़ा बदलाव: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट