
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ अस्थायी युद्धविराम अब टूटने की कगार पर दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर दोबारा हवाई हमला किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदर अब्बास क्षेत्र में देर रात कई बड़े विस्फोट सुनाई दिए।
ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार रात करीब 1:30 बजे बंदर अब्बास के पूर्वी हिस्से में तीन जोरदार धमाके हुए। विस्फोटों के तुरंत बाद ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली सक्रिय हो गई और कई मिनट तक जवाबी गतिविधियां जारी रहीं। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अभी तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
वहीं, एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा के तहत यह कार्रवाई की। अमेरिका का दावा है कि ईरान की सैन्य गतिविधियां और ड्रोन मूवमेंट हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अमेरिकी और व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। इसी कारण ईरान के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि कई घातक ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया गया।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक बाजार और तेल सप्लाई पर असर डाल सकता है।
यह हमला पिछले 48 घंटों में ईरान पर अमेरिका का दूसरा बड़ा सैन्य ऑपरेशन माना जा रहा है। इससे पहले यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और ईरानी नौसेना की कुछ बोट्स को निशाना बनाया था। अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इन बोट्स का इस्तेमाल समुद्री रास्तों में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए किया जा रहा था।
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा। ईरानी सरकार का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं करेगी।
इस बीच, ओमान और कतर की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बैक-चैनल वार्ताएं भी जारी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ सख्त और दीर्घकालिक समझौते पर जोर दिया है। कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह मौजूदा प्रस्तावित समझौते से संतुष्ट नहीं हैं और ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
ये भी पढ़ें: रूस का बड़ा ऑफर: भारत के 3,600 से अधिक टैंकों को बनाया जाएगा और घातक, T-90 भीष्म होंगे और ताकतवर