
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे अंतरराज्यीय रैकेट का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड प्रमोद वेंकटेश कुलकर्णी उर्फ पी.वी. कुलकर्णी अब केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के शिकंजे में है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी का यह काला साम्राज्य महाराष्ट्र के पुणे से लेकर गुजरात के गोधरा तक फैला हुआ था।
कौन है पी.वी. कुलकर्णी?
पी.वी. कुलकर्णी चिकित्सा और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के क्षेत्र का एक जाना-माना नाम है। वह पिछले एक दशक से महाराष्ट्र के पुणे और नासिक क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित शिक्षा सलाहकार (Education Consultant) और निजी कोचिंग अकादमी का संचालन कर रहा था। शुरुआत में एक ईमानदार शिक्षक के रूप में पहचान बनाने वाला कुलकर्णी धीरे-धीरे शार्टकट से पैसा कमाने के चक्कर में पेपर लीक माफिया का किंगपिन बन गया।
पुणे से गुजरात तक फैला नेटवर्क
कुलकर्णी का नेटवर्क बेहद शातिर और संगठित था। जांच के अनुसार, उसने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के भीतर के कुछ भ्रष्ट कर्मियों और प्रिटिंग प्रेस के कर्मचारियों के साथ साठगांठ की थी। गुजरात के पंचमहाल जिले के गोधरा में स्थित जय जलाराम स्कूल परीक्षा केंद्र से जब इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तब जांच की कड़ियां सीधे कुलकर्णी से जुड़ीं। वह गोधरा के स्थानीय शिक्षक तुषार भट्ट और वडोदरा के शिक्षा सलाहकार परशुरम रॉय के साथ मिलकर गुजरात के छात्रों को अवैध रूप से पास कराने का सौदा कर रहा था।
डार्क वेब और ₹50 लाख की डील
मास्टरमाइंड कुलकर्णी लीक हुए प्रश्नपत्रों और उनके उत्तरों को सुरक्षित रखने के लिए सामान्य सोशल मीडिया के बजाय डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों का उपयोग करता था। वह प्रति छात्र ₹30 लाख से ₹50 लाख रुपये वसूलता था। उसके पुणे स्थित आवास पर सीबीआई की छापेमारी में करोड़ों रुपये के ब्लैंक चेक, कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो इस घोटाले में उसकी सीधी संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।
मनीषा वाघमारे की भूमिका: इस काम में उसकी सहयोगी मनीषा वाघमारे (पुणे की एक 46 वर्षीय ब्यूटीशियन) ने उन अमीर छात्रों और अभिभावकों को इकट्ठा किया, जो पेपर के लिए मोटी रकम देने को तैयार थे। मनीषा को सीबीआई ने 14 मई को ही गिरफ्तार कर लिया था।
सीबीआई की देशव्यापी कार्रवाई : इस मामले में सीबीआई अब तक कुलकर्णी सहित 8 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पिछले 24 घंटों में देश भर में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है, जहां से करोड़ों के ब्लैंक चेक, गैजेट्स और मनी ट्रेल के दस्तावेज मिले हैं। सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या एनटीए (NTA) के कुछ अन्य शीर्ष अधिकारी भी कुलकर्णी के इस सिंडिकेट का हिस्सा थे। सरकार ने पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी और अब आने वाले समय में नए नियमों के तहत दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।
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